फिल्मों में भावनात्मक त्रासदी का सौंदर्यशास्त्र -राजेश कुमार सिन्हा मनुष्य ने जब पहली बार किसी कथा को केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि उसे जीने के...
फिल्मों में भावनात्मक त्रासदी का सौंदर्यशास्त्र -राजेश कुमार सिन्हा मनुष्य ने जब पहली बार किसी कथा को केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि उसे जीने के...
आरक्षण : नई वैचारिकी की जरूरत – शिवदयाल अगर अनुसूचित जाति/जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था का लाभ इन्हीं वर्गों...
भारत में फैला जेन- जी का शब्दजाल अमेरिकी पिच पर खेल रहे संघ और सरकार — अनिल विभाकर अमेरिका में गढ़ी गई नई शब्दावली ‘जेन- जी’...

साइबर सुरक्षा डर, आलस और लालच: साइबर अपराधियों के सबसे बड़े हथियार “डिजिटल सुविधा के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ठग डर,...

हिंदी साहित्य 15 जुलाई 2026 पठन समय: 5 मिनट शिवदयाल हिंदी साहित्य एवं चिंतन सूरज की किरणें वर्षा की बूँदों पर पड़ती हैं और सात रंगों...

डॉ. श्रीभगवान सिंह 1. ‘‘भारत के बाहर डॉ. प्रसाद स्वभावतः ही भारतीय गणराज्य के राष्ट्रपति के रूप में अपनी दीर्ध सेवा के लिए ही सर्वाधिक प्रसिद्ध...

विकल्पहीनता का बेजा लाभ न उठाये सरकार अनिल विभाकर भाजपा चलने लगी अब कांग्रेसी चाल। पुरानी राह पर चल रहे विपक्षी दलों का भी नहीं है...

मानवीय संवेदनाओं का बहु आयामी चित्रण है सिनेमा राजेश कुमार सिन्हा सिनेमा एक ऐसा लोकप्रिय दृश्य श्रव्य माध्यम है जिसमें हम किसी न किसी कहानी के...
सृष्टि में, जीवन में एक शाश्वत विरह है। हम सभी एक ही तत्व से उद्भूत हो अलग-अलग अस्तित्व बने मानो पुनः एक होने की आकुलप्रतीक्षा में...
“जब तक भारतवर्ष की महिलाएँ पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर धार्मिक, राजनीतिक एवं सांसारिक मामलों में बराबरी से अपनी भूमिका का निर्वाह नहीं करती...
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